हम पुलिस हैं, घरेलू नोकर नहीं, महाकाल की नगरी उज्जैन से उठी न्याय की पुकार
मुख्यमंत्री जी से तत्काल हस्तक्षेप की माँग
ट्रेड आरक्षकों को जी.डी. में संबिलियन पुनः प्रारंभ किया जाए
प्रशिक्षण, पदोन्नति और स्मार्ट पुलिसिंग में भागीदारी मिले
हर वर्ष ₹250 से ₹300 करोड़ की वर्बादी बंद हो
महाकाल की नगरी उज्जैन से उठी न्याय की पुकार
अपमान से झुकी वर्दी के सम्मान में महाकाल के दरबार पहुंचे जवान, राजनीतिक हलकों में हलचल, मामला मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र का
उज्जैन | मध्यप्रदेश पुलिस के 5500 से अधिक ट्रेड आरक्षकों ने देश में शायद पहली बार एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए अपनी पीड़ा सीधे न्याय के देवता महाकाल बाबा के दरबार में रखी है। इन सिपाहियों ने उज्जैन से एक सामूहिक प्रार्थना-पत्र भेजकर मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।
पत्र में ट्रेड आरक्षकों ने बताया है कि उन्हें जनता की सुरक्षा के लिए नहीं बल्कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निजी बंगलों में घरेलू नौकरों की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है जिसमें झाड़ू-पोंछा, बर्तन धोना, साफ सफाई करना, खाना बनाना, बच्चों और पालतू कुत्तों की देखभाल जैसे कार्य उनसे कराए जा रहे हैं — जो न केवल संविधान बल्कि मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है।
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