रीवा शहर में अब थानों के कामकाज को लेकर अजब-गजब हालात सामने आने लगे हैं। ताजा मामला महिला थाना रीवा से जुड़ा है, जहां पीड़ितों और पत्रकारों से थाने के भीतर प्रवेश से पहले ही मोबाइल फोन बाहर रखवाए जाने का आरोप सामने आया है,,,

 इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की पारदर्शिता और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं,,,

मामला कल का बताया जा रहा है, जब एक पीड़िता अपने साथ वकील और एक पत्रकार को लेकर महिला थाना पहुंचा आरोप है कि जैसे ही सभी लोग थाना परिसर में पहुंचे, थाना प्रभारी ने स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिया कि “आप सभी अपने मोबाइल फोन बाहर रख दीजिए,,,,

इस निर्देश के पीछे न कोई लिखित आदेश बताया गया, न ही कोई ठोस वजह,,,,

जब थाना जनता के लिए है, जब पीड़ित अपनी शिकायत लेकर पहुंच रहा है, तो मोबाइल फोन से आखिर किसे और क्यों डर लग रहा है,,,

क्या मोबाइल फोन केवल इसलिए बाहर रखवाए जा रहे हैं ताकि बातचीत, व्यवहार या प्रक्रिया रिकॉर्ड न हो सके,,,

अधिवक्ता और पत्रकारों का कहना है कि आज के दौर में मोबाइल पीड़ित की सुरक्षा, सबूत और संवाद का अहम जरिया बन चुका है। ऐसे में बिना किसी कानूनी आधार के मोबाइल बाहर रखवाना, संदेह को और गहरा करता है,,,,

कानूनी जानकारों की मानें तो थाने में मोबाइल रखने पर कोई सामान्य प्रतिबंध कानून में स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं है, खासकर जब पीड़ित अपनी शिकायत दर्ज कराने आया हो,,,

ऐसे में थाना प्रभारी की यह कार्यप्रणाली न केवल सवालों के घेरे में है, बल्कि महिला थाना जैसी संवेदनशील इकाई की छवि पर भी असर डाल रही है,,,

 क्या महिला थाना में सब कुछ नियमों के मुताबिक चल रहा है,,,

या फिर मोबाइल से दूर रखकर कुछ अनकहे सच” छुपाने की कोशिश की जा रही है और क्या वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेंगे फिलहाल यह मामला चर्चा में है और जवाबों का इंतजार है क्योंकि सवाल सिर्फ मोबाइल का नहीं, पुलिस विभाग के विश्वास और पारदर्शिता का है,,,

न्यूज़ सोर्स : अनिल शर्मा मध्य प्रदेश प्रमुख