MP: पुलिस यातायात प्रभारी ने कार्रवाई की आहट मिलते ही रील की गायब एक जैसा अपराध, अलग-अलग सज़ा क्या ? वर्दी में भी इंसाफ़ जेंडर देखकर होता है
सोशल मीडिया पर लाइक और फॉलोअर्स की चाह जब वर्दी की गरिमा पर भारी पड़ जाए, तब सवाल सिर्फ एक रील का नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यशैली का खड़ा होता है,,,
ऐसा ही मामला सामने आया है मध्य प्रदेश के इंदौर पुलिस से जुड़ा, जहाँ रील बनाने का शौक एक प्रधान आरक्षक को महँगा पड़ गया, लेकिन रीवा शहर की यातायात प्रभारी अनिमा शर्मा की वही गलती दूसरी ओर बिना सज़ा के छूटती नजर आई,,,
इंदौर में तैनात प्रधान आरक्षक रंजीत सिंह पर पुलिस वर्दी, सरकारी गाड़ी, हथियार और हथकड़ी के साथ रौब झाड़ती रील बनाने का आरोप सामने आया। इतना ही नहीं, जेल के बाहर वर्दी में खड़े होकर वीडियो बनाना भी अनुशासनहीनता की श्रेणी में पाया गया,,,,
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुए, जांच शुरू हुई और कार्रवाई की भनक लगते ही रील डिलीट कर दी गई लेकिन तब तक देर हो चुकी थी,,,
विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए रंजीत सिंह को प्रधान आरक्षक से आरक्षक पद पर डिमोट कर दिया। साथ ही, उनके खिलाफ एक और विभागीय जांच भी चल रही है। पहले से ही एक युवती द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के चलते उन्हें लाइन अटैच किया जा चुका था,,,,
इसी तरह का मामला रीवा शहर से भी सामने आया, जहाँ यातायात प्रभारी अनिमा शर्मा द्वारा वर्दी में वीडियो और रील बनाए जाने के आरोप सोशल मीडिया पर वायरल हुए। सरकारी गाड़ी और आधिकारिक छवि का इस्तेमाल कर बनाए गए वीडियो लोगों के बीच चर्चा का विषय बने,,,,
लेकिन जैसे ही कार्रवाई की आशंका बनी, यातायात प्रभारी अनिमा शर्मा ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से सभी वीडियो डिलीट कर दिए। हैरानी की बात यह रही कि इतने स्पष्ट तथ्यों के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई,,,,
जब इस पूरे मामले में रीवा एसपी से सवाल किए गए, तो उन्होंने किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। न जांच की पुष्टि, न कार्रवाई का संकेत सिर्फ खामोशी,,,
एक जैसा अपराध, अलग व्यवहार क्यों
यही वह बिंदु है जहाँ जनता के बीच गुस्सा और असमंजस दोनों साफ दिखाई देते हैं।
इंदौर में पुरुष प्रधान आरक्षक पर तत्काल कार्रवाई,,,
रीवा में महिला यातायात प्रभारी पर चुप्पी
क्या कानून वर्दी के भीतर लिंग देखकर लागू होता है,,,
क्या अनुशासन सिर्फ कुछ लोगों के लिए है
या फिर रसूख और पद के आगे नियम बौने पड़ जाते हैं,,,
इस खबर के सामने आने के बाद एसपी और आला अधिकारियों की आंतरिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया पर लोग खुलकर कह रहे हैं कि अगर अनुशासनहीनता अपराध है, तो वह हर अधिकारी के लिए समान होनी चाहिए,,,,
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या
रीवा यातायात प्रभारी पर भी निष्पक्ष जांच होगी
या फिर यह मामला एसपी कार्यालय और आला अधिकारियों की फाइलों में दबकर रह जाएगा,,,
रीवा एसपी और शहर में बैठे अधिकारी और सिपाही भी जानना चाहते की कार्रवाई होगी या फिर नहीं और जनता भी जवाब चाहती है और जवाब देना अब एसपी के सिस्टम की मजबूरी बनता जा रहा है,,
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