MP: थाना परिसर में भंडारा, चौराहा पर शराब कारोबार, संरक्षण के आरोपों के बीच पुलिस तंत्र पर उठे सवाल
चोरहटा थाना परिसर में भंडारा, लक्ष्मी चौराहा पर शराब कारोबारसंरक्षण के आरोपों के बीच पुलिस तंत्र पर उठे सवाल,,,
रीवा शहर के चोरहटा थाना क्षेत्र को लेकर इन दिनों चर्चाओं का बाजार गर्म है एक ओर थाना परिसर स्थित मंदिर में भंडारे के आयोजन की खबर सुर्खियों में है, ,,,,
तो दूसरी ओर लक्ष्मी चौराहा क्षेत्र में कथित रूप से चल रहे शराब कारोबार और उसे लेकर उठ रहे संरक्षण के आरोपों ने पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं,,
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि लक्ष्मी चौराहा के आसपास खुलेआम शराब की बिक्री हो रही है,,,
आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि इस अवैध कारोबार को कुछ प्रभावशाली लोगों का समर्थन प्राप्त है,,,
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन क्षेत्र में चर्चा है कि थाना स्तर पर सख्ती नहीं दिखने से ऐसे तत्वों का मनोबल बढ़ा हुआ है,,,
इसी बीच थाना परिसर के मंदिर में भंडारे का आयोजन भी चर्चा का विषय बना रहा। क्षेत्र में यह बात फैल रही है कि कथित रूप से शराब कारोबार से जुड़े कुछ लोगों ने इस आयोजन में आर्थिक सहयोग दिया,,,
हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन जनचर्चा ने इसे राजनीतिक और प्रशासनिक रंग दे दिया है,,,
सबसे गंभीर आरोप थाना प्रभारी आशीष मिश्रा के नाम पर लगाए जा रहे हैं कुछ लोग यह आरोप लगा रहे हैं कि उनके संरक्षण में क्षेत्र में अवैध गतिविधियां फल-फूल रही हैं,,,
वहीं पुलिस विभाग की ओर से इन दावों पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया अब तक सामने नहीं आई है,,,
सूत्रों के अनुसार, थाने के अंदर भी हालात सामान्य नहीं बताए जा रहे,,,
चर्चा है कि थाना परिसर में एक “तिगड़ी” का प्रभाव बढ़ गया है, जिसके चलते कुछ सिपाही असहज महसूस कर रहे हैं,,,
यह भी कहा जा रहा है कि कुछ जवान नियमित ड्यूटी से बचते हुए डायल 112 सेवा में अपनी ड्यूटी दे रहे हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है,,,
क्षेत्र में एक नाम “शिवा” का भी लिया जा रहा है, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि उसका थाने में प्रभाव है,,,
सवाल यह उठ रहा है कि आखिर वह कौन है, जिसका नाम लेकर कर्मचारी असहज महसूस कर रहे हैं,,,
क्या वास्तव में थाने के कामकाज में बाहरी हस्तक्षेप है, या यह केवल अफवाहों का दौर है,,
जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि थाना परिसर और उससे जुड़े क्षेत्र में इस तरह की चर्चाएं हैं, तो प्रशासन स्पष्टता क्यों नहीं दे रहा,,,
क्या उच्चस्तरीय जांच की आवश्यकता है,,,
चोरहटा थाना क्षेत्र से उठ रहे ये सवाल केवल एक थाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे कानून-व्यवस्था तंत्र की पारदर्शिता और जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं,,,
अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हैं या फिर तथ्यों
की जांच कर स्थिति स्पष्ट करते हैं,,,

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