मऊगंज,मध्य प्रदेश की जेल व्यवस्था एक बार फिर कठघरे में है। इस बार मामला मऊगंज जेल से जुड़ा है, जहां एक पूर्व बंदी ने जेल स्टाफ पर मारपीट, अवैध वसूली और शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाने जैसे बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं,,,

 हैरानी की बात यह है कि मामला तब सामने आया है जब प्रदेश की गृह व्यवस्था की जिम्मेदारी खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास है,,,

मऊगंज जेल के भीतर ‘रेट लिस्ट,,

पीड़ित के मुताबिक, 16 दिसंबर को वह छह अन्य लोगों के साथ एक मामले में मऊगंज जेल पहुंचा। आरोप है कि जेल में दाखिले के बाद ही ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों ने उसे बगिया ग्राउंड के पीछे रसोई क्षेत्र में ले जाकर मारपीट की। यहीं से शुरू हुआ ‘सुविधा के बदले रकम’ का खेल,,,

पीड़ित का दावा है कि जेल स्टाफ ने उसके परिजनों को फोन कर साफ शब्दों में कहा अगर जेल में चैन से रहना है, तो पैसे देने होंगे,,,

रुपए 20 हजार से शुरू होकर रुपए 45 हजार तक वसूली,,,

शुरुआत में रुपए 20,000 लिए गए। इसके बाद अलग-अलग बहानों से और रकम मांगी गई। कुल मिलाकर रुपए 45,000 से ज्यादा की वसूली होने का आरोप है,,,

पीड़ित का कहना है कि मुलाकात के दौरान उसकी मां, पत्नी और बहन से भी खाने-पीने का सामान और पैसे मंगवाए गए, लेकिन वह सामान उस तक कभी नहीं पहुंचा,,,,

सबूत होने का दावा, फिर भी कार्रवाई शून्य

पीड़ित का यह भी कहना है कि उसके पास कॉल रिकॉर्डिंग, लेनदेन से जुड़े वीडियो और बातचीत के प्रमाण मौजूद हैं,,,

 उसने कलेक्टर से लेकर सीएम हेल्पलाइन तक शिकायत की, लेकिन आज तक किसी ठोस जांच या कार्रवाई की सूचना नहीं मिली,,,,

शिकायत की तो धमकियां शुरू

आरोप यहीं नहीं रुकते। पीड़ित का दावा है कि शिकायत सामने आने के बाद जेल स्टाफ और उनसे जुड़े लोग फोन कर शिकायत वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। मारपीट और झूठे केस में फंसाने की धमकियां भी दी जा रही हैं,,,,

यह मामला सिर्फ एक बंदी तक सीमित नहीं है, बल्कि जेल व्यवस्था के भीतर चल रहे कथित भ्रष्ट तंत्र की ओर इशारा करता है,,,,

जब प्रदेश का गृह मंत्रालय खुद मुख्यमंत्री के पास है,जब कानून-व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता बताई जाती है, तब मऊगंज जेल जैसे मामलों पर खामोशी क्यों,,,

अब निगाहें सरकार और प्रशासन पर टिकी हैं।

क्या वायरल हो रहे वीडियो और आरोपों के आधार पर स्वतंत्र जांच होगी,,,

क्या दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या मामला फाइलों में दबा दिया जाएगा,,,

फिलहाल जेल प्रशासन या संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है,,,

सच क्या है, यह जांच के बाद ही साफ होगा लेकिन सवाल अभी से भाजपा की सरकार के दरवाजे पर दस्तक दे चुके हैं,,,,

न्यूज़ सोर्स : अनिल शर्मा मध्य प्रदेश प्रमुख