उपमुख्यमंत्री के गृह जिले में ट्रैफिक पर सवाल, यातायात प्रभारी अनिमा शर्मा का बयान बना चर्चा का विषय
उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला के गृह जिले में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाग आईजी, डीआईजी और एसपी जैसे वरिष्ठ अधिकारियों के हाथ में है, लेकिन शहर की सड़कों पर बढ़ते जाम को लेकर दिया गया यातायात प्रभारी अनिमा शर्मा का बयान अब लोगों को हैरान कर रहा है,,,
बताया जा रहा है कि भीड़ और जाम की स्थिति को लेकर उन्होंने बाजार में बढ़ती आवाजाही और जनप्रतिनिधियों की गतिविधियों को कारण बताया। बयान सामने आते ही शहर में चर्चा तेज हो गई। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या ट्रैफिक व्यवस्था संभालना अब सिर्फ भीड़ पर ठीकरा फोड़ने तक सीमित रह गया है,,,
जो जनता टैक्स देती है, वही घंटों जाम में फंसी रहेऔर जिम्मेदारी किसी और पर डाल दी जाए यह सोचने का विषय है,,,
शहर जवाब चाहता है व्यवस्था क्या कहेगी,,,
रीवा में ट्रैफिक पर सियासत तेज नेताओं और जनता पर जाम का ठीकरा, उठे सवालों के बवंडर,,,,
रीवा शहर में बढ़ते ट्रैफिक जाम को लेकर अब बयानबाज़ी ने सियासी रंग ले लिया है। हाल ही में यातायात व्यवस्था को लेकर दिए गए बयान के बाद बहस छिड़ गई है कि आखिर जाम की असली वजह क्या है ,,,
नेताओं का आगमन या आम जनता की रोज़मर्रा की आवाजाही शहर में अक्सर मुख्यमंत्री से लेकर विभिन्न दलों के बड़े नेताओं का आगमन होता रहता है,,,
ऐसे मौकों पर सुरक्षा और प्रोटोकॉल के चलते यातायात कुछ समय के लिए प्रभावित होता है, जिससे लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। वहीं दूसरी ओर, मार्केट एरिया में रोज़ाना बढ़ती भीड़ और अव्यवस्थित पार्किंग भी जाम की एक बड़ी वजह मानी जा रही है,,,
यातायात प्रभारी अनिमा शर्मा का कहना है कि अगर नेता नहीं आएंगे तो जाम कम होगा, और यदि लोग बाजार नहीं जाएंगे तो भी ट्रैफिक हल्का रहेगा,,,,
लेकिन सवाल यह है कि क्या शहर की रफ्तार को रोककर समाधान निकाला जा सकता है? क्या बाजार, दफ्तर और राजनीतिक कार्यक्रमों को बंद कर देना ही विकल्प है,,,
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि शहर में कई स्थानों पर ऑटो और टैक्सियां मनमाने ढंग से खड़ी हो जाती हैं, सड़कों पर ही गाड़ियों की मरम्मत शुरू हो जाती है, जिससे यातायात बाधित होता है,,,,
ट्रैफिक नियमों के पालन में असमानता के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर नियम सभी पर समान रूप से लागू हों और सख्ती से अमल हो, तो स्थिति काफी हद तक सुधर सकती है,,,
राजनीतिक हलकों में भी यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों ही अपनी-अपनी दलीलें दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी बयान को लेकर प्रतिक्रिया की बाढ़ आ गई है,,,
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उपमुख्यमंत्री और एसपी को ट्रैफिक समस्या के स्थायी समाधान के लिए क्या ठोस कदम उठाता है। क्या शहर में वैकल्पिक रूट, पार्किंग व्यवस्था और सख्त मॉनिटरिंग लागू होगी, या फिर बयानबाज़ी के बीच जाम का मुद्दा यूं ही सुलगता रहेगा,,,,
रीवा की जनता फिलहाल यही चाहती है कि समाधान व्यावहारिक हो ताकि ना शहर की रफ्तार थमे और ना ही आम लोगों को रोज़ाना की परेशानी झेलनी पड़े,,,,

मौत के मुंह में रीवा की जनता ओवरलोडिंग पर सवाल, यातायात व्यवस्था और रीवा के आला अधिकारियों की कार्य-प्रणाली कटघरे में
रीवा। शहर की सड़कों पर एक बार फिर से सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है सामने आए वीडियो और तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि वाहन खुलेआम ओवरलोडिंग कर सड़कों पर दौड़ रहे हैं,,,
लापरवाही की हद तब दिखती है जब वाहन पर लदा सामान असंतुलित नजर आता है जरा सा झटका लगे और बड़ा हादसा हो गया है,,,
ओवरलोडिंग का खुला खेल, जिम्मेदार कौन
तस्वीर में दिख रहा है कि वाहन पर निर्धारित क्षमता से अधिक सामग्री लादी गई है,,
यदि ऐसा “अप्लाई बोर्ड” या लोहा सामग्री किसी राहगीर या दोपहिया सवार पर गिर जाए तो परिणाम जानलेवा हो सकते हैं। सवाल यह है कि क्या इस तरह की ओवरलोडिंग पर निगरानी हो रही है,,,
अनिल वाणी का कहना है कि कई बार मुख्य मार्गों पर न तो यातायात पुलिस की सक्रिय मौजूदगी दिखती है और न ही नियमित चेकिंग। ऐसे में ओवरलोडिंग करने वालों के हौसले बढ़ना स्वाभाविक है,,,
यातायात प्रभारी अनिमा शर्मा की भूमिका पर उठते सवाल शहर में चर्चा है कि जब-जब यातायात प्रभारी की मौजूदगी दिखती है, किसी न किसी विवाद की खबर सामने आ जाती है, लेकिन रोजमर्रा की सड़कों पर उनकी सख्त निगरानी कम ही नजर आती है। नागरिक पूछ रहे हैं क्या नियमित पेट्रोलिंग और ओवरलोडिंग पर सख्ती नहीं होनी चाहिए,,,
यदि उस समय कोई अधिकारी मौके पर होता, तो क्या ऐसी लापरवाही रोकी नहीं जा सकती थी यही सवाल अब चाय पान के ठेलो और जनचर्चा का विषय बना हुआ है,,,
उपमुख्यमंत्री के गृह जिले में ढिलाई
चूंकि रीवा प्रदेश के उपमुख्यमंत्री का गृह जिला है, इसलिए अपेक्षा और भी अधिक रहती है कि यहां कानून-व्यवस्था और यातायात नियंत्रण आदर्श हो। लेकिन यातायात प्रभारी अनिमा शर्मा की मौजूदा तस्वीरें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं,,,
जनता के बीच यह चर्चा भी है कि क्या प्रभावशाली पदों की वजह से कार्रवाई में ढिलाई बरती जा रही है हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं है, पर सवाल जरूर उठ रहे हैं,,,
हादसा होने के बाद ही जागेगा सिस्टम सबसे बड़ा प्रश्न यही है क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है,,,
ओवरलोडिंग केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि सीधे तौर पर लोगों की जान से खिलवाड़ है,,,
शहरवासियों की मांग है कि ओवरलोड वाहनों पर तत्काल अभियान चलाया जाए,,,
नियमित चेकिंग और चालानी कार्रवाई हो
संवेदनशील मार्गों पर यातायात पुलिस की स्थायी तैनाती सुनिश्चित की जाए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए,,,
प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही जरूरी है। यदि सड़क पर स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो संबंधित विभाग को सक्रिय होना होगा,,,,
रीवा की जनता यह जानना चाहती है कि उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है
क्योंकि सड़क पर एक छोटी सी चूक, किसी परिवार की पूरी जिंदगी बदल सकती है,,,,
अब देखना यह है कि उपमुख्यमंत्री से लेकर आला अधिकारी तक इस मुद्दे पर क्या संज्ञान लेते हैं और ओवरलोडिंग के इस खेल पर कब तक लगाम लगती है,,,
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