MP: आदिवासी जिलों में अधिकारियों की बल्ले बल्ले ,सरकारी योजनाओं को पलीता लगा रहे हैं जिले के जनजातीय विभाग के अधिकारी
आदिवासी बाहुल्य झाबुआ जिले में जनजातीय विभाग का बड़ा फर्जीवाड़ा
Eow की बड़ी कार्यवाही
13 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद 2 करोड़ 98 लाख से अधिक का फर्जी पेमेंट उजागर
Mp अजब गजब कहावत पूरी तरह से सत्य नजर आ रही है वह भी आदिवासी बाहुल्य जिले झाबुआ में आदिवासी बाहुल्य जिलों में सरकार ग्रामीण इलाकों में बेहतर शिक्षा प्रदान करने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है आखिर इतनी अच्छी खासी राशी खर्च करने के बाद भी आदिवासी बाहुल्य जिलों में शिक्षा का स्तर बेहतर नहीं हो रहा है इसका मुख्य कारण जनजातीय विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों की मनमानी इसका ताजा उदाहरण 13 वर्षों बाद eow की जांच में सामने आया झाबुआ जिले में जनजातीय विभाग में 2.98 करोड़ का घोटाला,ईओडब्ल्यू इंदौर ने तत्कालीन सहायक आयुक्त समेत 4 अफसरों पर की दर्ज की एफआईआर.......
जनजातीय विभाग में और भी है घोटाले को शिकायते,आगे भी नपेंगे कई अधिकारी व कर्मचारी....
जनजातीय कार्य विभाग झाबुआ में सामग्री खरीदी के नाम पर करोड़ो के भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ईओडब्ल्यू इंदौर ने विभाग के चार तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ 2 करोड़ 98 लाख 41 हजार 738 रुपए की वित्तीय अनियमिताओं को लेकर एफआईआर दर्ज की है। यह गड़बड़ियां वर्ष 2013-14 से 2019-20 के बीच की बताई है।
पहुंचाया शासन को करोड़ों का नुकसान.....
ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया है कि अनुसूचित जनजाति के छात्र-छात्राओं के लिए छात्रावासों,आश्रमों और स्कूल में उपयोग होने वाली सामग्री की खरीदी में भंडार क्रय नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया गया है। आरोप है कि अधिकारियों ने आपसी सांठगांठ कर बिना टेंडर प्रक्रिया,दर निर्धारण और संदिग्ध बिलों के आधार पर भुगतान कर शासन को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया है। ईओडब्ल्यू ने आरोपियों के खिलाफ धारा 420-धोखाधड़ी,409-अपराधिक न्यास भंग ,120 बी-षड्यंत्र भारतीय दंड संहिता के तहत तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13/1-एफ एवं 13/2 के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है ।
छात्रावासों तक सामग्री पहुंचने का रिकॉर्ड ही नहीं...
उल्लेखनीय है कि जांच में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2013-14 में शासन द्वारा निर्धारित फर्मों से ही सामग्री खरीदी जाने का दावा किया गया लेकिन वितरण के समय प्राप्तकर्ताओं के हस्ताक्षर अभिलेख में मौजूद ही नहीं थे। वही 2014-15 से 2019-20 के बीच भी कई संस्थान से निर्धारित प्रारूप में मांग पत्र तक नहीं लिए गए। जिन मांग पत्रों की उपलब्धता बताई गई,उन पर भी पालक समिति अध्यक्ष और विकासखंड शिक्षा अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं पाए गए।
बिना टेंडर और बिना रेट लिए ही,खरीद ली सामग्री.......
ईओडब्ल्यू की जांच में यह भी उजागर हुआ कि वर्ष 2015-16 से 2019-20 के दौरान स्टेशनरी,डस्टबिन,शूज स्टैंड,बर्तन जैसी आदि सामग्री स्थानीय विक्रेताओं से बिना टेंडर और बिना दर निर्धारण खरीदी की गई। नियमों के अनदेखी कर पद का दुरुपयोग किया गया और फर्जी व संदिग्ध बिलों के माध्यम से भुगतान भी कर दिया गया।
इन अधिकारियों व अफसरों पर हुई एफआईआर......
ईओडब्ल्यू इंदौर ने जिन अधिकारियों को आरोपी बनाया,जिनमें निम्न शामिल है................
1-प्रशांत आर्य-तत्कालीन सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विभाग,झाबुआ
2-भारत सिंह-तत्कालीन सहायक परियोजना प्रशासक आदिवासी विकास,झाबुआ
3-अयूब खान-तत्कालीन भंडार शाखा प्रभारी लेखपाल,झाबुआ
4-राघवेंद्र सिंह सिसोदिया-तत्कालीन बजट शाखा प्रभारी,जनजाति कार्य विभाग -झाबुआ
आगे भी नपेंगे कई अधिकारी व कर्मचारी....
जनजातीय कार्य विभाग झाबुआ में घोटाले और भ्रष्टाचार की और भी शिकायतें है जिसकी जांच होना है। जांच के बाद आगे भी कई अधिकारी और कर्मचारी पक्का नपेंगे। हमारे द्वारा आने वाले दिनों में और भी कई बड़े खुलासे खाने की संभावना है
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