रीवा जिले की राजनीति और कानून व्यवस्था एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। मनगवां विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक इंजीनियर नरेंद्र प्रजापति पर हुए हमले ने न सिर्फ जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि आम नागरिकों की चिंता भी बढ़ा दी है,,,,,,

घटना 25 जनवरी की बताई जा रही है। सूरानाथ हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित जन्मोत्सव कार्यक्रम के दौरान अचानक हालात बिगड़ गए। विधायक नरेंद्र प्रजापति के अनुसार, रिंकू सिंह और गुड्डू उर्फ गड़ासा शराब के नशे में धुत होकर मौके पर पहुंचे और उत्पात मचाने लगे,,,,,,

 विधायक के साथ गाली-गलौज की गई, अपशब्द कहे गए और कार्यक्रम में मौजूद माता-बहनों के साथ भी अभद्रता की गई। कुछ देर के लिए माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि कार्यक्रम स्थल पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई,,,,,

विधायक का साफ कहना है कि यदि मौके पर मौजूद कार्यकर्ता समय रहते दोनों आरोपियों को नहीं पकड़ते, तो कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी। उनका यह भी आरोप है कि पूरी घटना पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा लगती है। जिन लोगों ने यह हरकत की, वे कोई आम व्यक्ति नहीं, बल्कि पहले से आपराधिक पृष्ठभूमि वाले बताए जा रहे हैं। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दूसरा अब भी फरार है लेकिन सवाल सिर्फ मनगवां तक सीमित नहीं है,,,,,,,

 मऊगंज की तस्वीर भी उतनी ही चिंताजनक नजर आ रही है। यहां भाजपा विधायक प्रदीप पटेल जमीन के मामले में धरना देने के बाद अचानक गायब हो जाते हैं। करीब 20 दिनों से उनके सामने नहीं आने की चर्चा है। इसी बीच एक वीडियो सामने आता है, जिसमें वे अपने बच्चों को घर में ही रहने की सलाह दे रहे हैं। जब विधायक और उनका परिवार ही खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा, तो आम जनता की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है,,,,

नजर डालें तो मनगवां की तरफ जाए, तो वहां भी हालात अलग नहीं दिखते। खुले में जनप्रतिनिधि के साथ गाली-गलौज, मां-बहन की अभद्र भाषा और जान को खतरा यह सब उस जिले में हो रहा है, जहां कानून व्यवस्था को मजबूत होने का दावा किया जाता है। लोगों का कहना है कि अगर आसपास मौजूद लोग बीच-बचाव नहीं करते, तो नतीजे और भी भयावह हो सकते थे,,,

आज रीवा और मऊगंज की सड़कों, गलियों और चौराहों पर यही चर्चा है जब विधायक ही खुद को असुरक्षित महसूस करें, अपराधियों का हौसला इतना बुलंद हो और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठें, तो आम आदमी किस भरोसे जिए? कानून अगर कागजों में मजबूत है लेकिन जमीन पर कमजोर दिखाई दे रहा है, तो यह हालात सिर्फ चेतावनी नहीं, बल्कि खतरे का संकेत हैं,,,,,

न्यूज़ सोर्स : अनिल शर्मा मध्य प्रदेश प्रमुख