रीवा जिले के बैकुंठपुर अस्पताल में कलेक्टर का औचक निरीक्षण, व्यवस्थाओं पर उठे गंभीर सवाल

रीवा जिले के बैकुंठपुर स्थित शासकीय अस्पताल में उस समय हड़कंप मच गया, जब कलेक्टर औचक निरीक्षण के लिए पहुंचीं,,,

निरीक्षण के दौरान जो तस्वीर सामने आई, उसने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोल दी और जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली और कलेक्टर पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया,,,

डॉक्टर गायब, रजिस्टर में हस्ताक्षर तक नहीं

निरीक्षण के समय अस्पताल के जिम्मेदार डॉक्टर मौके से नदारद मिले,,,,,

 कई कर्मचारियों के उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर तक दर्ज नहीं थे सवाल यह उठता है कि यदि कलेक्टर की नियमित मॉनिटरिंग होती, तो क्या ऐसी स्थिति बनती,,,

सरकारी अस्पताल में डॉक्टर की टेबल पर निजी जांच केंद्र के पर्चे सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि एक डॉक्टर की टेबल पर निजी जांच केंद्रों के पर्चे रखे मिले,,,,

 इससे यह संदेह गहराता है कि कहीं मरीजों को सरकारी सुविधा के बजाय निजी जांच केंद्रों की ओर तो नहीं भेजा जा रहा था,,,,

कमरे में शराब की बोतलें और अव्यवस्था

अस्पताल के एक कक्ष में कागज के कार्टून में शराब की बोतल और डिस्पोजल सामग्री मिली,,,,,

 यह दृश्य सरकारी अस्पताल की गरिमा के बिल्कुल विपरीत था स्वास्थ्य सेवा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की लापरवाही जनता के विश्वास को चोट पहुंचाती है,,,

गर्भवती महिलाओं का बीपी कलेक्टर के सामने,,,,

निरीक्षण के दौरान गर्भवती महिलाओं का ब्लड प्रेशर कलेक्टर की मौजूदगी में जांचा गया इससे यह सवाल खड़ा होता है कि क्या पहले नियमित स्वास्थ्य परीक्षण नहीं हो रहे थे यदि हो रहे थे तो फिर मौके पर ऐसी स्थिति क्यों बनी,,,

रसोई में राशन नहीं, मरीजों को भोजन नहीं

अस्पताल की रसोई में पर्याप्त राशन नहीं मिला। मरीजों को समय पर भोजन न मिलने पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई यह स्थिति बताती है कि व्यवस्था कागजों में चल रही थी, जमीन पर नहीं,,,,

गंदगी और पेयजल व्यवस्था पर भी सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल परिसर अक्सर गंदगी से घिरा रहता है जहां पेयजल की व्यवस्था है, वहीं आसपास स्वच्छता का अभाव दिखता है,,,,

साफ-सफाई जैसी बुनियादी जिम्मेदारी भी ठीक से नहीं निभाई जा रही थी,,,

रीवा कलेक्टर से बड़ा सवाल पहले क्यों नहीं हुई सख्त जांच,,,,

यदि समय-समय पर प्रभावी निरीक्षण होते, तो शायद इतनी कमियां एक साथ सामने नहीं आतीं। यह केवल बैकुंठपुर अस्पताल की बात नहीं, बल्कि जिले के अन्य शासकीय अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न खड़े करती है,,,

क्या नियमित निरीक्षण सिर्फ कागजों में हो रहे थे जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी या नहीं क्या ऐसी लापरवाही पर ठोस कार्रवाई होगी,,,

स्वास्थ्य सेवाएं किसी भी समाज की बुनियाद होती हैं। यदि अस्पतालों में डॉक्टर गायब हों, रजिस्टर खाली हों और मरीजों को भोजन तक न मिले, तो यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सामाजिक चिंता का विषय है,,,

अब देखना यह होगा कि यह निरीक्षण केवल नाराजगी तक सीमित रहता है या वास्तव में “दूध का दूध और पानी का पानी” करने वाली कार्रवाई भी सामने आती है,,,

न्यूज़ सोर्स : भास्कर करोंद संदेश एडिटर-इन-चीफ अनिल की वाणी