MP: पुराने बस स्टैंड पर पुलिस सिपाही की एजेंटगिरी’ का खेल चौकी की मौजूदगी में वसूली,थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
भास्कर करोंद संदेश एडिटर-इन-चीफ अनिल की वाणी,,,,,
रीवा के पुराने बस स्टैंड पर पुलिस सिपाही की एजेंटगिरी’ का खेल चौकी की मौजूदगी में वसूली,थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल,,,,
रीवा शहर के पुराने बस स्टैंड पर इन दिनों एक बार फिर अव्यवस्था और विवाद का माहौल बनने लगा है,,,,
यात्रियों की भीड़ और बसों की आवाजाही के बीच यहां एजेंटों का एक ऐसा तंत्र सक्रिय बताया जा रहा है, जिस पर बस संचालक और स्थानीय लोग गंभीर आरोप लगा रहे हैं,,,,
कहा जा रहा है कि यात्रियों को बसों में बैठाने और बसों को आगे बढ़ाने के नाम पर एजेंटों द्वारा खुलेआम वसूली की जा रही है, और यह सब कुछ पुलिस चौकी की मौजूदगी में हो रहा है,,,
स्थानीय व्यापारियों और बस संचालकों का आरोप है कि बस स्टैंड पर तैनात कुछ एजेंट रोजाना बस चालकों और कंडक्टरों से पैसे लेते हैं,,,,,
यदि कोई चालक पैसे देने से मना करता है, तो उसकी बस को आगे बढ़ने से रोक दिया जाता है और उसकी जगह दूसरी बस को रवाना कर दिया जाता है,,,
इस कारण कई बार एजेंटों और बस कर्मचारियों के बीच तीखी बहस और विवाद की स्थिति भी बन जाती है,,,
रोजाना हजारों यात्रियों की आवाजाही, फिर भी नियंत्रण नहीं पुराना बस स्टैंड शहर का एक प्रमुख परिवहन केंद्र माना जाता है, जहां से प्रतिदिन हजारों यात्री अलग-अलग शहरों के लिए सफर करते हैं,,,
सुबह करीब 6 बजे से लेकर रात 11 बजे तक यहां से लगातार बसें रवाना होती हैं,,,
इन बसों में स्थानीय और बाहरी जिलों से आने वाली गाड़ियां भी शामिल हैं, जो इंदौर, उज्जैन, भोपाल, गुना, सागर, जबलपुर, ग्वालियर और छतरपुर जैसे शहरों के लिए संचालित होती हैं,,,
इतनी बड़ी संख्या में बसों के संचालन के बावजूद व्यवस्था संभालने के लिए कोई स्पष्ट और पारदर्शी प्रणाली नजर नहीं आती,,,,
50 से 100 रुपए प्रति बस वसूली का आरोप बस संचालकों का कहना है कि बाहरी जिलों से आने वाली बसों से एजेंट अक्सर 50 रुपए से 100 रुपए तक की वसूली करते हैं। यह रकम देखने में भले ही कम लगे, लेकिन दिन भर में बसों से पैसा लिया जाता है,,,
कुछ बस कर्मचारियों का दावा है कि इस वसूली से रोजाना करीब 4 हजार से 5 हजार तक की रकम इकट्ठी हो जाती है,,,,
आरोप यह भी है कि इस पूरी व्यवस्था के पीछे कुछ पुलिसकर्मियों की मौन सहमति या संरक्षण होने की चर्चा बस स्टैंड पर खुलेआम की जा रही है,,,,
पुराने बस स्टैंड चौकी की मौजूदगी पर उठ रहे सवाल बस स्टैंड परिसर में पुलिस चौकी मौजूद है, लेकिन स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि यहां पुलिस की सक्रियता कम ही दिखाई देती है,,,,
उनका आरोप है कि सिपाही अक्सर तभी नजर आते हैं जब वसूली का समय होता है,,,,
एक दुकानदार ने बताया कि कई बार बस स्टैंड पर एजेंटों और बस कर्मचारियों के बीच विवाद होता है, लेकिन चौकी में तैनात पुलिसकर्मी मौके पर नजर नहीं आते,,,
इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर चौकी होने के बावजूद व्यवस्था पर नियंत्रण क्यों नहीं हो पा रहा,,,
गांव से आने वाले यात्रियों को भी हो रही परेशानी बस स्टैंड पर चल रही इस खींचतान का असर यात्रियों पर भी पड़ रहा है,,,
कई बार एजेंटों के विवाद के कारण बसों के रवाना होने में देरी हो जाती है, जिससे यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ता है,,,,
कुछ यात्रियों ने बताया कि बस स्टैंड पर अक्सर बहस और झगड़े की स्थिति बन जाती है, जिससे माहौल असहज हो जाता है,,,,
ऐसे में यात्रियों को सुरक्षित और व्यवस्थित यात्रा की सुविधा मिलना मुश्किल हो जाता है,,,
पुलिस अधीक्षक तक पहुंची शिकायत
बताया जा रहा है कि पुराने बस स्टैंड के व्यापारियों और कुछ बस संचालकों ने इस पूरे मामले की शिकायत कई बार पुलिस अधीक्षक तक भी पहुंचाई है,,,
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बस स्टैंड पर एजेंटों द्वारा वसूली की जा रही है और इस पर रोक लगाने की जरूरत है,,,
हालांकि अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है जिससे लोगों में यह धारणा बन रही है कि शिकायतों के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है,,,,
रीवा शहर का कानून क्या कहता है
नियमों के अनुसार बस स्टैंड परिसर में पार्किंग या अन्य शुल्क केवल नगर पालिका या अधिकृत ठेकेदार ही वसूल सकता है,,,,,
इसके अलावा किसी भी व्यक्ति या एजेंट द्वारा बस चालकों या यात्रियों से पैसा लेना पूरी तरह अवैध माना जाता है,,,,
ऐसी स्थिति में यदि बस स्टैंड पर एजेंटों द्वारा वसूली की बात सही साबित होती है, तो यह न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि परिवहन व्यवस्था और पुलिस व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करता है,,,,
अब आला अधिकारियों पर कार्रवाई का इंतजार बस स्टैंड पर रोजाना होने वाली कथित वसूली और एजेंटगिरी को लेकर लोगों की निगाहें अब प्रशासन पर टिक गई हैं,,,
सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस व्यवस्था की जांच कर सख्त कदम उठाएंगे या फिर बस स्टैंड पर चल रहा यह अनौपचारिक ‘एजेंट सिस्टम’ इसी तरह चलता रहेगा,,,,
फिलहाल पुराने बस स्टैंड की स्थिति यही संकेत दे रही है कि यहां व्यवस्था से ज्यादा अनौपचारिक तंत्र का प्रभाव दिखाई दे रहा है और यही वजह है कि थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं,,,,
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