MP: पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल, कट्टा कारतूस के साथ गिरफ्तारी के बाद ‘सेटिंग’ की चर्चा
रीवा कोतवाली पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल, कट्टा कारतूस के साथ गिरफ्तारी के बाद ‘सेटिंग’ की चर्चा,,,
रीवा। गणतंत्र दिवस के आसपास 26–27 जनवरी की रात कोतवाली थाना क्षेत्र में अवैध हथियार के साथ कुछ लोगों की गिरफ्तारी की खबर शहर में तेजी से फैली, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि आधिकारिक स्तर पर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अब तक स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है,,,
बताया जा रहा है कि आरोपियों को देसी कट्टा और जिंदा कारतूस के साथ पकड़ा गया था,,,
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक पुलिस ने कार्रवाई कर आरोपियों को हिरासत में लिया और जेल भी भेजा गया,,,
परंतु सवाल यह है कि अगर गिरफ्तारी हुई, तो फिर इसकी सार्वजनिक जानकारी क्यों नहीं दी गई,,
प्रेस नोट या आधिकारिक ब्रीफिंग का अभाव पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला रहा है,,
इसी बीच शहर में यह भी चर्चा है कि आरोपियों से कथित तौर पर 20 20 हजार रुपये लेकर मामला ‘सेट’ कर दिया गया,,,
हालांकि इस दावे की पुष्टि किसी आधिकारिक दस्तावेज से नहीं हुई है, लेकिन चर्चाओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं,,,
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब अवैध हथियार के साथ आरोपी पकड़े गए थे, तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई का सार्वजनिक रिकॉर्ड क्यों नहीं दिख रहा क्या आरोपियों को बचाने की कोशिश की गई यदि जेल भेजा गया, तो मामला आगे किस स्थिति में है,,,
सूत्रों का कहना है कि उच्च अधिकारियों तक भी पूरे घटनाक्रम की जानकारी पहुंच चुकी है, फिर भी अब तक किसी प्रकार की स्पष्ट जांच या कार्रवाई सामने नहीं आई है इससे पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर आमजन में असंतोष देखा जा रहा है,,,
गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि क्यों नहीं की गई,,,
आरोपियों की पहचान और मुकदमे की स्थिति सार्वजनिक क्यों नहीं है,,,
यदि ‘सेटिंग’ की चर्चा झूठी है तो पुलिस विभाग खुलकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करता,,,
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इस मामले में पारदर्शी जांच कराते हैं या नहीं,,,
अगर आरोप बेबुनियाद हैं तो सच्चाई सामने लाना उतना ही जरूरी है, और यदि कहीं चूक हुई है तो जवाबदेही तय होना भी उतना ही आवश्यक है,,,
रीवा की कानून व्यवस्था और पुलिस की साख के लिए यह मामला परीक्षा की तरह देखा जा रहा है,,,

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