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रीवा की सियासत में ‘दोहरी राजनीति’ का आरोप, बयानबाज़ी पर गरमाया माहौल,,,

रीवा। शहर की राजनीति में इन दिनों बयानबाज़ी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है,,,

 महापौर अजय मिश्रा ‘बाबा’ से उठे एक सवाल ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है,,,,

सवाल यह है कि जब कांग्रेस के शहर अध्यक्ष अशोक पटेल ‘झब्बू’ पर ब्राह्मण समाज के लिए अपशब्द कहने का आरोप लगा था, तब विरोध के स्वर उतने मुखर क्यों नहीं थे,,,

 लेकिन जैसे ही विधानसभा में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान पर कांग्रेस ने सड़कों पर उतरकर विरोध जताया, तो क्या यह दोहरी नीति नहीं मानी जाएगी,,,

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नेताओं के बयान अब सिर्फ शब्द नहीं रह गए हैं, बल्कि सामाजिक संवेदनाओं से जुड़े मुद्दे बनते जा रहे हैं,,,

 ब्राह्मण समाज से जुड़े कथित अपमानजनक टिप्पणी के मामले में अलग-अलग दलों के रुख को लेकर सवाल उठ रहे हैं,,,,

एक पक्ष का कहना है कि अगर किसी भी समाज के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग होता है, तो विरोध एकसमान और सिद्धांत आधारित होना चाहिए चाहे वक्ता किसी भी दल से हो,,,

दूसरी ओर कांग्रेस का तर्क है कि विधानसभा में दिए गए बयान का संदर्भ अलग था और उसे तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया पार्टी नेताओं का कहना है कि वे किसी भी समाज का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे, लेकिन राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दों को हवा देना भी ठीक नहीं है,,,

महापौर अजय मिश्रा ‘बाबा’ से जुड़े इस सवाल ने अब शहर में नई बहस छेड़ दी है क्या विरोध और समर्थन का पैमाना व्यक्ति और दल के हिसाब से तय होगा या फिर सामाजिक सम्मान जैसे विषयों पर एक समान नीति अपनाई जाएगी,,,

रीवा की राजनीति में यह मामला फिलहाल चर्चा का केंद्र बना हुआ है अब देखना होगा कि आगे यह विवाद संवाद में बदलता है या फिर आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति और तेज होती है,,,

न्यूज़ सोर्स : भास्कर करोंद संदेश एडिटर-इन-चीफ अनिल की वाणी,