राजभर की रणनीति पर सवाल, निषाद पार्टी की सीटों को लेकर हलचल
लखनऊ | उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए अभी एक साल से ज्यादा का समय बचा हुआ है. इससे पहले तमाम नेता अपने और अपने परिवार के लिए आरक्षित सीटों की तलाश में जुट गए हैं. इस सब काम में सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने सबसे ज्यादा तेजी से काम लिया है. उन्होंने अपनी परंपरागत जहूराबाद सीट छोड़ने का फैसला ले लिया है. इसके साथ ही उन्होंने संजय निषाद की पार्टी के प्रभाव वाली सीट पर चुनाव लड़ने का फैसला लिया है. इसके बाद से ही कई तरह के सवाल खड़े होने लगे हैं.ओम प्रकाश राजभर ने गाजीपुर की जहूराबाद विधानसभा सीट छोड़कर आजमगढ़ की अतरौलिया सीट से चुनाव लड़ने की बात कही है. इस सीट पर संजय निषाद की पार्टी चुनाव लड़ती आ रही है. ऐसे में एनडीए में सबकुछ ठीक होने को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं. राजभर का यह ऐलान संजय निषाद के लिए काफी परेशानी करने वाला है. ऐसा इसलिए क्योंकि उन सीटों पर दावा ठोका है जो निषाद पार्टी की हैं.
राजभर की बात मानेगा एनडीए?
ओमप्रकाश राजभर यूपी में बीजेपी और सपा दोनों के साथ ही रह चुके हैं. फिलहाल वह एनडीए में हैं और उन्होंने जब से अपनी पसंदीदा सीटों का ऐलान किया है. तब से कई नेताओं में नाराजगी देखने को मिली है. लेकिन उम्मीद है कि एनडीए आलाकमान उनकी बात को सुनेगा और सही फैसला लेगा. यही वजह है कि संजय निषाद ने अब तक अपना रुख शांत रखा हुआ है. हालांकि कुछ राजनीतिक जानकारों का यह भी मानना है कि पूर्वांचल क्षेत्र में पहले भी सीट शेयरिंग आसान नहीं रही है, अगर राजभर अपनी जिद पर अड़े रहते हैं तो समीकरण और आने वाले दिनों कुछ अलग ही समीकरण देखने को मिल सकते हैं.
क्यों अपनी पुरानी सीट छोड़ रहे राजभर?
पुराने लोगों का नहीं मिलेगा साथ?
ओम प्रकाश राजभर ने अपनी परंपरागत और मजबूत मानी जाने वाली सीट जहूराबाद छोड़ने का ऐलान कर दिया है. जहां से वो दो बार से विधायक चुनकर आए हैं. ऐसा कहा जा रहा है कि साल 2022 के चुनाव में राजभर ने अपना चुनाव सपा के साथ मिलकर लड़ा था. यही वजह है कि उस समय उन्हें अंसारी परिवार का साथ मिल गया था. अगर इस चुनाव में वह वहां से बीजेपी के सहारे लड़ते हैं तो उन्हें कड़ा मुकाबला मिल सकता है. ऐसा कहा जा रहा है कि अंसारी परिवार के डर से ही राजभर ने सीट बदलने का ऐलान किया है.
सवर्ण समाज की नाराजगी पड़ेगी भारी
ओमप्रकाश राजभर अपनी बयानबाजी के कारण हमेशा ही चर्चा में बने रहते हैं, कई बार उन्हें अपने बयानों की वजह से विरोध का सामना भी करना पड़ा है. ऐसा कहा जा रहा है कि इस बार सवर्ण जातियां राजभर से नाराज हैं और उनका वोट मिलना मुश्किल माना जा रहा है. उनके साथ घोसी विधानसभा सीट पर भी कुछ ऐसा ही हुआ था. यही वजह है कि उन्होंने बचाव करते हुए इस बार बहुत पहले ही पचड़े से दूर होने का फैसला ले लिया है.
सेफ जोन में खेलना चाहते हैं राजभर
राजभर को लेकर राजनीतिक गलियारों चर्चा यह भी है कि वह सुरक्षित सीट से ही चुनाव लड़ना चाहते हैं. इसी वजह से उन्होंने अपने लिए अतरौलिया सीट को चुना है तो बेटे अरविंद राजभर के लिए दीदारगंज सीट चाहते हैं.
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