विदेश मंत्री ने सर्वदलीय बैठक में भरोसा दिया, विपक्ष असंतुष्ट
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष को लेकर बुधवार शाम संसद परिसर में सर्वदलीय बैठक हुई. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में कुल 8 केंद्रीय मंत्री शामिल हुए, जिनमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर, गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी प्रमुख थे. विदेश सचिव ने भी विपक्ष को विस्तृत ब्रिफिंग दी. विपक्ष की तरफ से समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव, AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी, सीपीआईएम के जॉन ब्रिटास और अन्य नेता मौजूद रहे.
बैठक में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की हत्या की निंदा न करने पर विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए. ओवैसी और धर्मेंद्र यादव ने पूछा कि इस अमानवीय कृत्य की निंदा क्यों नहीं की गई? विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान की मध्यस्थता वाले सवाल पर सख्त जवाब दिया. उन्होंने कहा, "भारत दलाल राष्ट्र नहीं बन सकता." जयशंकर ने स्पष्ट किया कि 1981 से अमेरिका पाकिस्तान का इस्तेमाल ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता के लिए करता आ रहा है.
उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत कभी चुप नहीं रहा—हम हमेशा टिप्पणी करते रहे और जवाब देते रहे. जयशंकर ने कहा, "हम सबके अच्छे दोस्त हैं, लेकिन अमेरिका के साथ ठोस (tangible) लाभ वाले संबंध रखते हैं." साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि ईरान के साथ भारत के संबंध अभी भी अच्छे हैं.
सरकार ने बैठक में कुछ आंकड़े भी पेश किए जिसके तहत संकट के बाद 4.2 लाख (लगभग 4.27 लाख) भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाया गया. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में 18 जहाज फंसे हुए हैं, जिन पर भारतीय क्रू सदस्य हैं. सभी को निकालने के प्रयास जारी हैं. 4 जहाज आ चुके हैं और 5 आने वाले हैं.
इस बैठक में उर्वरक उत्पादन (Fertiliser production) पर भी गंभीर चर्चा हुई. विपक्ष ने चिंता जताई कि होर्मुज जलडमरूमध्य बाधिक होने से उर्वरक आयात प्रभावित हो सकता है, जिससे किसानों को नुकसान होगा. सरकार ने बताया कि घरेलू उत्पादन बढ़ाया गया है और आयात स्रोतों में विविधता लाई गई है. रूस से तेल आयात वर्तमान में कुल आयात का लगभग 20 प्रतिशत है, जो ऊर्जा सुरक्षा में सहायक है. विपक्ष ने लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में नियम 190 के तहत ईरान संकट पर विस्तृत बहस की मांग भी की.
जयशंकर ने अर्थव्यवस्था पर उठे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि सरकार स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में रखे हुए है. किरेन रिजिजू ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हर भारतीय की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से की गई बातचीत का जिक्र हुआ, जिसमें भारत ने साफ कहा कि हम युद्ध नहीं चाहते.
सरकार ने सभी दलों से सहयोग की अपील की और कहा कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा तथा आर्थिक स्थिरता पर नजर रखी जा रही है.
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