चेयरमैन के इस्तीफे से हड़कंप, HDFC Bank में बाहरी जांच शुरू
नई दिल्ली। देश के दूसरे सबसे बड़े निजी बैंक एचडीएफसी में शीर्ष स्तर पर हुए घटनाक्रम ने कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर नई बहस छेड़ दी है। बैंक ने पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे में उठाए गए मुद्दों की जांच के लिए बाहरी लॉ फर्म्स की नियुक्ति की है। बैंक के प्रवक्ता के अनुसार, यह कदम पूरी तरह से प्रोएक्टिव है, जिसका उद्देश्य इस्तीफे में बताए गए पहलुओं की स्वतंत्र, निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित समीक्षा करना है। प्रवक्ता ने कहा कि बैंक दशकों से अपनाए गए उच्चतम गवर्नेंस मानकों के अनुरूप खुद को लगातार परखता रहा है और यह पहल उसी दिशा में उठाया गया कदम है।
अचानक इस्तीफे से उठे सवाल
गौरतलब है कि अतनु चक्रवर्ती ने 18 मार्च से प्रभावी अपना पद अचानक छोड़ दिया था। उन्होंने अपने इस्तीफे में बैंक के भीतर कुछ घटनाओं और प्रथाओं का हवाला दिया, जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं थीं। 17 मार्च को लिखे अपने पत्र में उन्होंने साफ कहा कि पिछले दो वर्षों में देखी गई कुछ गतिविधियां उनके सिद्धांतों से मेल नहीं खातीं, और यही उनके इस्तीफे का मुख्य कारण है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसके अलावा इस्तीफे के पीछे कोई अन्य महत्वपूर्ण वजह नहीं है।
गवर्नेंस कमेटी को लिखा था पत्र
चक्रवर्ती ने अपना इस्तीफा बैंक की गवर्नेंस, नॉमिनेशन और रेम्यूनरेशन कमेटी के चेयरमैन एच. के. भनवाला को संबोधित किया था। उनके इस कदम को बैंक के इतिहास में अभूतपूर्व माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार कोई पार्ट-टाइम चेयरमैन कार्यकाल के बीच में पद छोड़कर गया है।
चक्रवर्ती का रहा लंबा प्रशासनिक अनुभव
1985 बैच के गुजरात कैडर के आईएस अधिकारी रहे चक्रवर्ती मई 2021 में बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन बने थे। इससे पहले वह वित्त मंत्रालय के तहत आर्थिक मामलों के सचिव और निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव रह चुके थे। उनका कार्यकाल 2024 में बढ़ाकर मई 2027 तक किया गया था।
एचडीएफसी-एचडीएफसी बैंक विलय के दौरान नेतृत्व
उनके कार्यकाल में ही एचडीएफसी लिमिटेड और एजडीएफसी बैंक के बीच ऐतिहासिक विलय पूरा हुआ, जो 1 जुलाई 2023 से प्रभावी हुआ। इस विलय के बाद बैंक का संयुक्त बैलेंस शीट आकार 18 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया, जिससे यह देश के सबसे बड़े वित्तीय संस्थानों में शामिल हो गया।
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