देखिए मध्य प्रदेश स्वास्थ्य मंत्री जी मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों का सच ऑक्सीजन पर पड़ा 15 साल का बच्चा, पर इलाज गायब
भास्कर करोंद संदेश एडिटर-इन-चीफ अनिल की वाणी,,,
देखिए मध्य प्रदेश स्वास्थ्य मंत्री जी मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों का सच ऑक्सीजन पर पड़ा 15 साल का बच्चा, पर इलाज गायब,,,
इलाज के नाम पर औपचारिकता, जिम्मेदारी से दूरी आखिर कब जागेगा स्वास्थ्य विभाग और स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ला,,
मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ताज़ा मामला एक 15 वर्षीय मासूम का है, जो जीवन और मौत के बीच जूझ रहा है,,,,
बच्चा ऑक्सीजन सपोर्ट पर है, लेकिन परिजनों का आरोप है कि न तो समय पर डॉक्टर उपलब्ध हैं और न ही नर्सिंग स्टाफ ठीक से देखभाल कर पा रहा है,,,
परिवार की आंखों में भय है, उम्मीद है पर सिस्टम की बेरुखी उस उम्मीद को तोड़ती नजर आ रही है,,,
वार्ड में मशीनें चल रही हैं, ऑक्सीजन दी जा रही है, लेकिन समुचित इलाज और नियमित निगरानी का अभाव साफ दिखाई देता है,,,
परिजनों का कहना है कि दवाइयों के लिए बाहर भेजा जा रहा है, जबकि अस्पताल में उपलब्ध सरकारी दवाइयां स्टॉक में पड़ी-पड़ी खराब हो रही हैं आरोप यह भी लग रहे हैं कि इलाज के नाम पर अलग से पैसों की मांग की जा रही है,,,,
सवाल यह है कि जब सरकार करोड़ों रुपये स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करने का दावा करती है, तो ज़मीनी हकीकत इतनी बदहाल क्यों है
क्यों डॉक्टर समय पर वार्ड में नहीं पहुंचते
क्यों नर्सों की जिम्मेदारी तय नहीं होती
क्यों गरीब परिवार इलाज के लिए दर-दर भटकते हैं,,,
एक मां अपने 15 साल के बेटे को ऑक्सीजन पर तड़पता देख रही है। उसके चेहरे पर एक ही सवाल है क्या सरकारी अस्पताल में इलाज होना गुनाह है,,,
स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ला जी, यह मामला सिर्फ एक बच्चे का नहीं है यह पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल है,,,
अगर अस्पतालों में डॉक्टर और नर्स संवेदनशील नहीं होंगे, अगर निगरानी व्यवस्था मजबूत नहीं होगी, तो सरकारी योजनाएं कागजों तक ही सीमित रह जाएंगी,,,
मुख्यमंत्री को चाहिए कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराए, जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई हो और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी मरीज को इलाज के लिए अपमानित या उपेक्षित न होना पड़े,,,
क्योंकि अस्पताल भरोसे की जगह होते हैं, निराशा की नहीं और 15 साल का एक बच्चा राजनीति नहीं, सिर्फ जीवन चाहता है,,,
यही हैं सरकारी अस्पतालों के हाल स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ला के मध्य प्रदेश में व्यवस्था पर उठते सवाल,,,
ऑक्सीजन पर मासूम, पर सिस्टम बेपरवाह इलाज के नाम पर इंतज़ार और लाचारी,,,
मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की तस्वीर एक बार फिर चिंता बढ़ा रही है। 15 साल का एक बच्चा अस्पताल के बिस्तर पर ऑक्सीजन सपोर्ट के सहारे जिंदगी की जंग लड़ रहा है,,,,
पास खड़ी उसकी मां खुद मास्क ठीक करती दिख रही है, क्योंकि समय पर डॉक्टर या प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की मौजूदगी पर सवाल खड़े हो रहे हैं,,,
अस्पताल की दीवारें गवाह हैं उस बेबसी की, जहां मशीनें तो चल रही हैं, लेकिन संवेदनशील देखभाल का अभाव साफ महसूस होता है,,,
परिजनों का आरोप है कि कई बार डॉक्टरों का इंतजार करना पड़ता है, दवाइयों के लिए बाहर भेजा जाता है, ,,,,
और जरूरी जांचों में देरी होती है।
सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के दावे करती है, लेकिन जमीनी हालात कुछ और कहानी बयां कर रहे हैं,,,
क्या अस्पतालों में पर्याप्त स्टाफ है
क्या मरीजों की निगरानी की ठोस व्यवस्था है
क्या गरीब परिवारों को मुफ्त इलाज का लाभ वास्तव में मिल पा रहा है,,,
एक मां अपने बच्चे की सांसों को संभालने की कोशिश कर रही है, क्योंकि उसे सिस्टम पर पूरा भरोसा नहीं रह गया है। यह सिर्फ एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर उठता बड़ा सवाल है,,,
स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ला जी, प्रदेश की जनता जवाब चाहती है। सरकारी अस्पतालों में इलाज का भरोसा बहाल करना सरकार की जिम्मेदारी है। यदि लापरवाही है तो कार्रवाई हो, यदि संसाधनों की कमी है तो उसे तुरंत दूर किया जाए,,,,
क्योंकि अस्पतालों में राजनीति नहीं, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी दिखनी चाहिए
और हर बच्चे को सिर्फ एक हक चाहिए समय पर सही इलाज,,,
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