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रीवा की गौशालाएं सवालों के घेरे में बेल्हा मद्रवाल गौशाला में बदहाल व्यवस्था, जिम्मेदारी तय कौन करेगा,,,

रीवा जिले में एक तरफ सरकार और भाजपा नेता गौशालाओं के नाम पर बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, वहीं ज़मीनी हकीकत उन दावों को कटघरे में खड़ा कर रही है। मऊगंज विधानसभा अंतर्गत ग्राम पंचायत बेल्हा मद्रवाल स्थित गौशाला की स्थिति बेहद चिंताजनक सामने आई है,,,

ग्रामीणों की लगातार शिकायतों और अनुरोध के बाद पूर्व विधायक सुखेन्द्र सिंह ‘बन्ना’ स्वयं गौशाला पहुंचे और व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। जो दृश्य सामने आया, वह किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर देने वाला था,,,

गौशाला में चारा और भूसे की भारी कमी, पशुओं के लिए पानी और देखरेख की लचर व्यवस्था, और इसी अभाव के चलते पशुओं की मौत तक की जानकारी सामने आई,,,,

निरीक्षण के दौरान कई पशु अत्यंत दयनीय अवस्था में दिखे हड्डियों का ढांचा बनते शरीर, भूख से तड़पते मवेशी और बुनियादी इंतज़ामों का अभाव। यह तस्वीरें और हालात साफ सवाल उठाते हैं कि जिस गौशाला के नाम पर बजट, योजनाएं और फाइलें चल रही हैं, उनका लाभ आखिर कहां जा रहा है,,,,

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बन्ना ने मौके से ही संबंधित अधिकारियों से फोन पर बात की और तत्काल चारा, भूसा एवं जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से बचने का मामला है और इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए,,,

गौशाला संचालन की जिम्मेदारी किसकी है

पंचायत, पशुपालन विभाग और जिला प्रशासन में से कौन जवाब देगा,,,

क्या रीवा की अन्य गौशालाओं की हालत भी इसी तरह कागज़ों में ठीक और ज़मीन पर बदहाल है,,,

सरकार गौशालाओं को संरक्षण और संवेदनशीलता का प्रतीक बताती है, लेकिन बेल्हा मद्रवाल की तस्वीरें उन दावों की सच्चाई उजागर कर रही हैं,,,,

यदि समय रहते जिम्मेदारी तय नहीं हुई और निगरानी नहीं बढ़ी, तो गौशालाएं संरक्षण का नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार ,लापरवाही और संवेदनहीनता का स्मारक बनकर रह जाएंगी,,,

अब देखना यह है कि निरीक्षण और फोन कॉल के बाद वाकई कार्रवाई होती है या मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता है,,,

न्यूज़ सोर्स : अनिल शर्मा मध्य प्रदेश प्रदेश प्रमुख