रीवा,,,यूजीसी एक्ट को लेकर चल रही राजनीतिक बयानबाज़ी अब केवल सभाओं और सोशल मीडिया तक सीमित नहीं दिख रही, बल्कि इसका असर बच्चों की सोच तक पहुंचता नजर आ रहा है,,,,

 हाल ही में सामने आए एक वीडियो में एक छोटी बच्ची यूजीसी एक्ट पर अपनी राय रखती दिखाई दे रही है बच्ची की बातें सुनकर यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर बच्चों के मन में यह मुद्दा किस तरह बैठाया जा रहा है,,,


वीडियो में बच्ची जिस आत्मविश्वास और शब्दावली के साथ यूजीसी एक्ट का जिक्र करती है, वह सामान्य बातचीत से आगे की प्रतीत होती है,,,,

 इससे यह बहस तेज हो गई है कि क्या राजनीतिक मुद्दों को इस तरह बच्चों तक पहुंचाया जाना उचित है,,,,

यूजीसी एक्ट, जो उच्च शिक्षा से जुड़ा एक संवेदनशील विषय है, इन दिनों राजनीतिक मंचों पर बहस का केंद्र बना हुआ है अलग-अलग दल अपने-अपने तर्क और दृष्टिकोण के साथ जनता के बीच जा रहे हैं,,,,

 लेकिन जब वही राजनीतिक विमर्श बच्चों की जुबान पर आ जाए, तो यह सामाजिक चिंता का विषय बन जाता है,,,

विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की सोच को प्रभावित करना आसान होता है,,,,,,,

 इसलिए जिम्मेदारी नेताओं और अभिभावकों दोनों की है कि वे संतुलित और सकारात्मक माहौल तैयार करें बच्चों के सामने किसी भी विषय को रखते समय उनकी उम्र और समझ का ध्यान रखा जाना जरूरी है,,,,

यह घटना केवल एक वीडियो भर नहीं, बल्कि यह संकेत है कि राजनीतिक संवाद किस हद तक सामाजिक दायरे में फैल चुका है अब जरूरत इस बात की है कि शिक्षा और राजनीति के बीच संतुलन बनाए रखते हुए बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता दी जाए,,,,

यूजीसी एक्ट पर बहस जारी रहे, लेकिन यह सुनिश्चित होना चाहिए कि मासूम सोच को राजनीतिक रंग से बचाया जाए  यही समाज की परिपक्वता की असली कसौटी है,,,,,

न्यूज़ सोर्स : भास्कर करोंद संदेश एडिटर-इन-चीफ अनिल की वाणी,,