विधानसभा में दो मोर्चों पर दबाव में सरकार, जवाब से बचती रही सत्ता
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा में सोमवार को सरकार को दो अहम मुद्दों पर विपक्ष के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा. महिदपुर के कस्तूरबा गांधी कन्या छात्रावास में छात्राओं की तबीयत बिगड़ने का मामला और मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह योजना में बीपीएल कार्ड अनिवार्य किए जाने का संशोधन चर्चा के केंद्र में रहे. महिदपुर स्थित सरकारी कस्तूरबा गांधी कन्या छात्रावास में दिसंबर माह में छात्राओं की तबीयत बिगड़ने की घटना को लेकर विधायक दिनेश जैन ने सवाल उठाया कि छात्रावास में धुआं आखिर कहां से आया और इसकी जिम्मेदारी किसकी है. उन्होंने कहा कि यदि छात्राओं के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है तो इसकी गंभीर जांच होनी चाहिए. इस पर जवाब देते हुए अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान ने कहा कि प्रदेश में कुल 1936 छात्रावास संचालित हैं और सभी स्थानों पर व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिस तरह की बात की जा रही है, उस संबंध में प्रश्न नहीं आया है. मंत्री के इस जवाब से विपक्ष संतुष्ट नहीं दिखा और मामले की पारदर्शी जांच की मांग करता रहा।
बसंत पंचमी में नहीं हुआ एक भी विवाह
दूसरा बड़ा मुद्दा मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह योजना में बीपीएल कार्ड अनिवार्य करने को लेकर उठा. कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार ने आरोप लगाया कि इस संशोधन के कारण बसंत पंचमी पर ग्वालियर संभाग में एक भी विवाह नहीं हो सका. उन्होंने मांग की कि गरीबी रेखा की बाध्यता समाप्त की जाए ताकि जरूरतमंद परिवार योजना से वंचित न रहें।
कमलनाथ की सरकार में हुआ था भ्रष्टाचार
इस पर सामाजिक न्याय मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि योजना में पहले अनियमितताओं और दोबारा शादी जैसी शिकायतें मिल रही थीं. पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी अपने कार्यकाल में इस योजना में भ्रष्टाचार की शिकायतें उठाई थीं. मंत्री ने बताया कि पात्रता सुनिश्चित करने के लिए बीपीएल की शर्त लागू की गई है और संशोधन के बाद भी प्रदेश में 13 हजार 642 विवाह संपन्न हो चुके हैं. कांग्रेस विधायक विवेक पटेल ने भी बीपीएल शर्त हटाने की मांग की. मंत्री ने आश्वासन दिया कि यह विषय मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा।
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