बायोडेटा में लिखें सास ससुर नहीं चाहिए: कोर्ट
बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली की फैमिली कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा, यदि सास ससुर नहीं चाहिए थे। तो इस बात का उल्लेख बायौडेटा में करना चाहिए था।
अपर प्रधान न्यायाधीश ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने तलाक के मामले की सुनवाई करते हुए महिला टीचर पर तीखी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा अगर किसी महिला को सिर्फ पति के साथ ही रहना है। उसे अपने साथ सास ससुर या किसी रिश्तेदार को नहीं रखना है। ऐसी स्थिति में शादी के लिए जो बायोडाटा तैयार किया जाता है।उसमें साफ-साफ लिखना चाहिए। उसे ऐसा पति चाहिए, जिसका कोई रिश्तेदार ना हो।
फैमिली कोर्ट ने कारोबारी सुभाशीष सिंह की तलाक याचिका को मंजूर करते हुए यह टिप्पणी की है। शुभाशीष ने 2019 में दीक्षा वर्मा से शादी की थी।शादी के बाद दीक्षा को सास ससुर के साथ रहना पसंद नहीं था। उसने एक अलग घर की मांग पति से की। पति द्वारा अलग घर नहीं देने के कारण वह पति से अलग रहने लगी। जिसकी परिणति तलाक के रूप में हुई।
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