MP: बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के पीएचडी शोध में बड़ा भ्रष्टाचार , नियम अनुसार 18 महीने या 24 महीने में होनी थी शोध कंप्लीट उसके पूर्व ही शोध जमा कर दी..
भोपाल: बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में पीएचडी थीसिस में बड़ा भ्रष्टाचार सामने आए हम आपको बता दें कि किस प्रकार से पीएचडी थीसिस समय से पूर्व जमा की जा रही है

जबकि बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के ऑर्डिनेंस 45 नियम के अनुसार 18 महीने या 24 महीने का समय रहता है थीसिस जमा करने का
या मान लीजिए की 2 साल में जमा कर सकते है
अगर गाइड अच्छा मिल जाए तो जल्दी भी जमा हो सकती है 18 महीना मे परंतु बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम सुर्खियों में बना ही रहता है जैसे राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का नाम बना रहता है

इस बार पीएचडी शोध में बड़ा घोटाला सामने आ रहा है वही शिकायतकर्ता विजय विश्वकर्मा के द्वारा लिखित शिकायत की अनुपम राजन और बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय के कुलगुरु एस के जैन और रजिस्टर एस बी सिंह को लिखित शिकायत दस्तावेज के साथ की गई है
अब देखना है कि बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के जो कुलगुरु हैं और रजिस्टर सिंह और उच्च शिक्षा के, PS श्री अनुपम राजन जी इन सब मामलों को लेकर क्या कार्रवाई करते हैं ।
मंत्रालय में पदस्थ ओएसडी अनिल पाठक के विरुद्ध शिकायतकर्ता ने शिकायत की है अब यह जांच का विषय है कि उनकी जो गणित में उनके द्वारा शोध किया है वह सही है या गलत या ओर उसी के आधार पर उनके द्वारा असिस्टेंट प्रोफेसर से उच्च पद लिया गया अब यह जांच का विषय है परंतु आप समझ ही सकते हैं कि किस प्रकार से भ्रष्टाचार किया जा रहा है शिक्षा के क्षेत्र में आगे और भी खुलासे करेंगे।

जांच का विषय
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