रीवा में 3 लाख का पुलिस थाना और सिंगरौली का 3 करोड़ की पुलिस थानों की पोस्टिंग’ का आरोप भोपाल तक गूंज, जवाब का इंतज़ार,,,,,,,,,,

जिले में थाना प्रभारी की पोस्टिंग को लेकर 3 करोड़ रुपये में सौदेबाजी का सनसनीखेज आरोप सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है,,,

 मामला सोशल मीडिया से लेकर राजधानी भोपाल तक चर्चा का विषय बना हुआ है,,,,

 जनता अब सीधा सवाल पूछ रही है आख़िर वह “3 करोड़ वाला थाना प्रभारी” कौन है,,,,

प्रदेश में पुलिस विभाग सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अधीन है ऐसे में यह सवाल और गंभीर हो जाता है कि यदि पोस्टिंग के बदले पैसों का खेल सच है, तो इसकी जानकारी जिम्मेदारों तक क्यों नहीं पहुंचती और यदि पहुंचती है, तो कार्रवाई क्यों नहीं होती,,,

रीवा में भी हाल के दिनों में पोस्टिंग से जुड़े ऑडियो वायरल होने की चर्चाएं गर्म थीं फेसबुक और अन्य मंचों पर कई दावे किए गए, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अब तक सामने नहीं आई पर एक के बाद एक ऐसे आरोप उठना व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े करता है,,,

 

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि किसी थाना प्रभारी ने कथित तौर पर करोड़ों खर्च कर पद लिया है, तो वह आम जनता और पीड़ितों को निष्पक्ष न्याय कैसे देगा,,,

 

 क्या वह अपनी “लागत” निकालने की मानसिकता से काम करेगा यही चिंता अब सिंगरौली ही नहीं, पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय है,,,

 

सूत्रों का कहना है कि मामला जनप्रतिनिधियों तक भी पहुंचा है लेकिन अब तक न तो खुलकर खंडन आया है, न ही किसी जांच की औपचारिक घोषणा। ऐसे में जनता के बीच संशय गहराता जा रहा है,,,,

अगर आरोप बेबुनियाद हैं, तो सरकार को खुलकर सामने आकर सच्चाई बतानी चाहिए और यदि आरोपों में दम है, तो निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए पारदर्शिता ही विश्वास को बचा सकती है,,,

सवाल यह भी उठ रहा है कि जब प्रदेश के कई जिलों से इसी तरह की फुसफुसाहटें सामने आती रही हैं, तो क्या यह महज़ अफवाह है या सिस्टम में कहीं गहरी खामी,,,

सिंगरौली का यह मामला केवल एक जिले की खबर नहीं, बल्कि भाजपा सरकार और पुलिस प्रशासनिक साख और जनता के भरोसे की कसौटी बन चुका है,,,,

अब निगाहें शासन पर हैं क्या सच सामने आएगा क्या जवाबदेही तय होगी या फिर यह मुद्दा भी शोर के बीच कहीं दब जाएगा फिलहाल जनता पूछ रही है, और जवाब का इंतज़ार है,,,

न्यूज़ सोर्स : भास्कर करोंद संदेश एडिटर-इन-चीफ अनिल की वाणी